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बुन्देलखण्ड की वीरभूमि 'महोबा'

महोबा उत्तर प्रदेश का एक प्राचीन शहर है, जो कभी बुन्देलखण्ड की राजधानी हुआ करती थी। यह नगर वीर आल्हा-ऊदल का नगर कहलाता है। महोबा रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूरी पर कई प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है।
Kishan Gupta
बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर
महोबा रेलवे स्टेशन से करीब 8 किमी. दूर बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर है। ऐसा माना जाता है कि यह देवी दानवों का नाश करती है और धर्मनिष्ठ व आस्था से भरे लोगों का उद्धार करती है।
स्टेशन से करीब 10 किमी. की दूरी पर रहेलिया सूर्य मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण चंदेल शासक राहिल देव वर्मन ने एक तालाब को खुदवाकर किया था, जिसे राहिल सागर के नाम से जाना जाता है।
सूर्य मंदिर
स्टेशन से करीब 10 किमी. की दूरी पर गोरख पहाड़ी है, जहां ग्रेनाइट चट्टानों से कई खूबसूरत आकृतियों बनी हुई हैं। इसके अलावा यहां कई प्राकृतिक झरने और शानदार गुफाएं हैं।
गोरख पहाड़ी
स्टेशन से करीब 3 किमी. की दूरी पर मदन सागर है। यहां आप जल विहार का लुत्फ उठा सकते हैं, जिसकी सहायता से आप यहां के नजारे को भी अच्छे से देख पाएंगे।
मदन सागर

ककरामठ मंदिर 
5. स्टेशन से करीब 10 किमी. की दूरी पर स्थित गोरख पहाड़ी पर ककरामठ मंदिर है। इस मंदिर की संरचना पिरामिड जैसी है, जो खुजराहो के मंदिर से काफी मिलती-जुलती है।
महोबा का किला एक सुप्रसिद्ध किला है, जो आल्हा-ऊदल के किले के नाम से भी जाना जाता है। ये किला वर्तमान समय में लगभग जमींदोज हो चुका है लेकिन आज भी अपने अंदर कई रहस्य समाए हुए है।
महोबा का किला 
शिव तांडव मंदिर
गोरख पहाड़ी पर स्थित शिव भगवान को समर्पित एक मंदिर है, जहां शिव की मूर्ति तांडव स्वरूप में है, जिसे शिव तांडव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की खूबसूरती देखने यहां काफी पर्यटक आते हैं।
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